Author: Shruti Vyas

हां, हम भारतीय लोकतंत्र से संतुष्ट!

हां, हम भारतीय लोकतंत्र से संतुष्ट!

कौन सोच सकता था कि पश्चिमी दुनिया की उन राजधानियों में लोकतंत्र लुढकेगा जिन्होंने कभी इसके धर्मग्रंथ लिखे थे!  मगर आज यही वास्तविकता है। पश्चिमी देशों में लोकतंत्र पर भरोसा...
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ट्रंप का अमेरिका वैश्विक बेगाना!

ट्रंप का अमेरिका वैश्विक बेगाना!

कौन सोच सकता था कि “नियम-आधारित व्यवस्था” का अपने को संरक्षक बताने वाला अमेरिका एक दिन दुनिया में अछूत बनने की और होगा?  जिसने उदार वैश्विक व्यवस्था बनवाई, नेटो को...
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स्वतंत्र सोच पूरी तरह सिकुड गई!

स्वतंत्र सोच पूरी तरह सिकुड गई!

कभी समय था जब सियासी असहमति का मतलब बहसबाजी थी। तथ्य तौलने के लिए रखे जाते थे। तब तर्कों की कसौटी होती थी, और गर्मागर्म बहस में भी सामने वाले...
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क्यों जेनरेशन जेड़ में राहुल फ्लॉप?

क्यों जेनरेशन जेड़ में राहुल फ्लॉप?

कांग्रेस को अब आत्ममंथन की ज़रूरत नहीं है बल्कि कायाकल्प याकि राजनीतिक पुनर्जन्म, या फिर एक शांत, गरिमापूर्ण राजनैतिक मौत की जरूरत है। लोकसभा चुनावों को डेढ़ वर्ष बीते हैं।...
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For the Day Bihar Thinks Beyond Caste

Complexity, despair and hope in Bihar "I am going to Patna, Bihar." "Why?" "It's election time." "Again…didn't you guys just have elections… How many times do you people vote, jeez!"...
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सोशल मीडिया धीरे-धीरे ढ़ह रहा है?

सोशल मीडिया धीरे-धीरे ढ़ह रहा है?

एक समय था जब फॉलोअर्स की संख्या से क़ीमत तय होती थी। जिसके ज़्यादा अनुयायी, वही असरदार, वही ‘प्रासंगिक’। मतलब भीड़ का आकार ही पहचान था, पहुँच थी, यहाँ तक...
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भारत अब विरोध नहीं करता

भारत अब विरोध नहीं करता

और इसलिए नहीं क्योंकि हम एक संतुष्ट, आत्मसंतोषी देश बन चुके हैं बल्कि इसलिए कि हम विरोध करना ही भूल गए हैं।पिछले एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से दिल्ली अपनी...
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जब ख़बरें ‘नई’ लगना बंद कर दे

जब ख़बरें ‘नई’ लगना बंद कर दे

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे तीस साल बाद फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करेंगे। उधर पाकिस्तान ने धमकी दी है कि तालिबान को फिर से गुफ़ाओं में धकेलने...
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जीवित रहने की बहस में सकंल्प कब?

जीवित रहने की बहस में सकंल्प कब?

क्या जलवायु चिंता से शुरू कोप (COP) सम्मेलन कुछ मायने रखता हैं? या सिर्फ बस एक नौटंकी है? यह प्रश्न अब स्थाई है पर बेचैन करने वाला, आवश्यक भी, मगर...
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दीवाली क्यों अपनी ख़ुशी के लिए माफ़ी मांगे?

दीवाली क्यों अपनी ख़ुशी के लिए माफ़ी मांगे?

हर साल, घड़ी की तरह, हंगामा फिर शुरू है। दीया बुझा भी नहीं होता कि नसीहत, प्रवचन बरसने लगे हैं। हवा के प्रदूषण के एक्यूआई (AQI) चार्ट टाइमलाइन पर आ...
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