Category: Indian Politics

युद्ध केवल ठहरते हैं, अब खत्म नहीं होते!

नेताओं की लोकलुभावन राजनीति की एक विचित्र विशेषता है। ऐसे नेता कभी किसी विजय को अंतिम जीत नहीं बनने देते। तभी हर चुनाव अब राष्ट्र के अस्तित्व की निर्णायक लड़ाई...
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राजनीति अब केवल अवसरवाद

अब भारत की राजनीति में धारा दक्षिणपंथ या धर्मनिरपेक्षता या वामपंथ की नहीं है। न ही  हिंदुत्व की है। 2026 की मौजूदा राजनीति में अब केवल अवसरवाद है। वही सर्वोपरी...
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मैं, आप कौन? कहां के नागरिक?

“मैं आखिर हूँ कौन?” यह सवाल बिना बुलाए आता है। कभी बीस साल की उम्र में, जब दुनिया आपसे निश्चित उत्तर चाहती है मगर आपके पास जवाब नहीं होता। कभी...
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रूस–यूक्रेन युद्ध 1,566 दिनों पार, दुनिया युद्ध खत्म कराना भूल गई!

यूक्रेन का युद्ध अब पहले महायु्द्ध से लंबा हो चुका है। यह तुलना केवल दिनों की संख्या के कारण चौंकाने वाली नहीं है। प्रथम विश्वयुद्ध 1,566 दिनों तक चला था...
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देश जिसे विरोध करना भुला दिया गया

छह जून की सुबह जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की एक मामूली-सी भीड़ जमा हुई। इसकी मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी। यूट्यूबर अपने फोन हाथ की दूरी पर...
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केकड़े लड़ रहे हैं, पानी सूख रहा है हर कोई दोषी है, कोई दोषी नहीं।

भारत मानो एक अघोषित गृहयुद्ध में है। केकड़ों वाली पुरानी कहावत अब छोटी पड़ गई है। उस प्रवृत्ति से आगे निकल गए हैं जहाँ केकड़े एक-दूसरे को नीचे खींचते थे।...
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मैं दिल्ली, हर चीज़ से पहले यहाँ थी!

मुझे हमेशा मेरे लोगों ने बनाया। वे लोग जो बाहर से आए, जिन्होंने मुझे अपनाया और ऐसा करके मुझे बनाया। मैं हमेशा दिल वालों की दिल्ली रही हूँ। जन्म से...
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कॉकरोच क्षण: हँसी का आईना

कॉकरोच अब राष्ट्रीय बहस है। किसने सोचा था कि एक बात भारत का वैश्विक हल्ला बनाने वाली होगी? चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद इंस्टाग्राम और X पर ऐसा व्यंग्य...
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हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026

हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026

सन् 1985 में नील पोस्टमैन ने “हँसते-हँसते विनाश की ओर” (Amusing Ourselves to Death) किताब लिखी थी। उसमें आधुनिक सभ्यता को लेकर एक ठंडी और बेचैन कर देने वाली चेतावनी...
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दुनिया का नया दरबार: बीजिंग

दुनिया का नया दरबार: बीजिंग

इस मई बीजिंग में दिलचस्प दृश्य, नजारा है। डोनाल्ड ट्रंप का ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में स्वागत हुआ। उन्होंने 21 तोपों की सलामी, सैन्य बैंड और अमेरिकी-चीनी झंडे लहराते...
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वीज़ा लाइन में हम और हमारे मैनर्स

वीज़ा लाइन में हम और हमारे मैनर्स

कुछ दिन पहले यह जानकर एक अजीब-सी संतुष्टि हुई कि भारत भी ब्रिटिश नागरिकों के वीज़ा खारिज करता है। डिनर टेबल पर यही चर्चा छिड़ी थी और प्रतिक्रिया लगभग ‘वाह’...
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क्या G2 ही अब दुनिया की नई व्यवस्था है?

क्या G2 ही अब दुनिया की नई व्यवस्था है?

आज बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठे हैं। यह केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं है। यह उस बदलती दुनिया की एक...
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“गर्मी 2026: स्थगित छुट्टियाँ”

“गर्मी 2026: स्थगित छुट्टियाँ”

2026 गर्मियों का नया अहसास लिए हुए है। न केवल मौसम बदला हुआ है, बल्कि गर्मियों की छुट्टियों का बोझ भी बढ़ा हुआ है। मौसम किसी यात्रा की संभावना नहीं,...
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जनता संयम करें, सत्ता उड़ान भरे!

जनता संयम करें, सत्ता उड़ान भरे!

तो अब जनता के लिए संयम का समय है। 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुपचाप परदा हटा दिया। असलियत सामने आई। देशवासियों से कहा गया—विदेश यात्राएं टालिए, ईंधन-तेल...
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क्षेत्रीय दलों का भी लेफ्ट जैसे हिसाब बराबर!

क्षेत्रीय दलों का भी लेफ्ट जैसे हिसाब बराबर!

ताजा चुनाव नें क्षेत्रीय दलों का भविष्य दिखला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार, तमिलनाडु में स्टालिन की फिसलन और केरल में वामपंथ की कमजोर होती...
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ममता ने भरोसा पहले गंवाया!

ममता ने भरोसा पहले गंवाया!

भारत के कोई सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव इसलिए नहीं हारती कि कोई विकल्प आ खड़ा हुआ है। उसका पतन तब होता है, जब विश्वास खत्म हो जाता है। और लगभग चुपचाप...
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नोटबंदी, कोविड के बाद फिर कतार का समय!

नोटबंदी, कोविड के बाद फिर कतार का समय!

भारत में फिर संकट की स्थिति है। यह वाक्य असाधारण नहीं है। रोजमर्रा की बात है। कई मायनों में संकट देश की एक स्थायी राष्ट्रीय स्थिति बन गया है। एक...
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खाडी में तीसरा सप्ताह ज्यादा सहमा हुआ!

खाडी में तीसरा सप्ताह ज्यादा सहमा हुआ!

अमेरिका–इज़राइल–ईरान युद्ध का तीसरा सप्ताह अब शुरू है और स्थिति गंभीर है। आखिर हर कोई हर किसी पर बम गिरा रहा है। इज़राइल लेबनान और ईरान पर हमले कर रहा...
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ईरान में व्यवस्था बची, सत्ता भी बदली!

ईरान में व्यवस्था बची, सत्ता भी बदली!

ईरान को नया सर्वोच्च नेता मिल गया है। हाल ही में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोज़तबा खामेनेई इस इस्लामी गणराज्य की सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठे हैं।...
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तो “दुबई मॉडल” भू-राजनीति की लपटों में!

तो “दुबई मॉडल” भू-राजनीति की लपटों में!

“दुबईकरण” (“Dubaization”) शब्द जितना आकर्षक है, उतना ही विरोधाभासी भी। शहरी अध्ययन के विद्वान यासर एलशेश्तावी का गढ़ा गया यह शब्द उस विकास मॉडल का प्रतीक है जो तमाशे और...
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अमेरिका की रहम और मौन

अमेरिका की रहम और मौन

भारत को आज अमेरिका से असामान्य ‘अनुमति’ मिली! अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा— अमेरिकी ट्रेज़री विभाग (वित्त मंत्रालय) ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी...
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कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के...
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